Saturday, June 5, 2021

Anniversary: Year 8

 

चमक सूर्य की अंधेरी भूमि पर आयी,

नज़ारा देख बच्ची सर उठा मुस्कुराई।

 

नम आंखे खुशी से जगमगाई,

गोल गोल घूम कर अपनी प्रसन्नता जताई।

 

इस खुशी के बीच उसने सोचा पुराना,

जीवन के लक्ष्य का उसे याद आया तराना।

 

अनेक प्रयासों के बाद भी सिर्फ असफलता ही मिली,

संघर्ष के बाद भी गर्व की कोई कली ना खिली।

 

समझ नहीं आया की गलती कहा हुई,

मन, तन, धन सब में हार हुई।

 

बहुत सोचने पर बात समझ आई,

प्रारम्भ से ही सड़क थी गलत अपनाई।

 

कभी अपने मौलिक सपने देख ना पाई,

दूसरो की तम्मनाओ में ढूंढती रही सुख की परछाई।

 

कभी पता न था खुशी का श्रोत,

फिर भी हर बंद दरवाज़ा देख लगती थी चोट।

 

मंज़िल नहीं थी कभी पूरी तरह अपनाई,

और भी बहुत कुछ, देता था सुनाई।

 

गिरती पतंग फिर से उड़ गई,

छूटती डोर फिर से थम गई।

 

बिखरे सपने फिर से बन गए,

खोए लक्ष्य फिर से मिल गए।

 

दुबारा देखूंगी स्वप्न, जो होंगे मेरे,

उसी से आएंगे जीवन में खुशी के सवेरे।

 

इस जीवन के हुए आठ वर्ष पूरे,

मुबारक हो सबको ये सात वर्ष।

No comments: