जीवन के इस सफर में कुछ लोग होते है बहुत खास,
जब आता है समय उनसे बिछुड़ने का तब होता है इस बात का एहसास।
उनका व्यक्तित्व होता है विशाल,
उनके कार्य की हर बात बन जाती है मिसाल।
भंडार विभाग के एक ऐसे ही है अफसर है आप, श्री रामलाल,
आपने ३७ वर्ष के रेल जीवन में करे बहुत कमाल।
आपके अंदर जो समाया है कार्य के प्रति समर्पण,
वो है आपका सबसे बड़ा आकर्षण।
आप बिना थके हर समय करते रहते है काम,
मुश्किल छोटी हो या बड़ी, निरंतर संघर्ष करते रहते है सुबह – शाम।
इन वर्षों में आपने बहुत कुछ सिखाया,
अपने विशाल अनुभव से छोटी–छोटी चीजों को दिखाया,
कभी सामने कुर्सी पर बैठाकर समझाया,
और कभी मीटिंग में बहुत डाट भी लगाया।
मार्ग दिखाया, मुश्किलों से बचाया,
प्रोत्साहित करके सराहनीय कार्य भी करवाया।
आपकी निष्ठा से बढ़ता है हम सबका स्वाभिमान,
आप हो भंडार ही नही, पूरी रेल की शान।

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